दुनिया में अलग अलग तरह के स्वाभाव वाले इंसान होते है । कुछ शांत स्वभाव के होते है । तो किसी को दिखावा पसंद है। जिस व्यक्ति में अहंकार होता है, उसकी सोच भी दिखावटी होती है। उससे बात करने से ऐसा लगता है जैसे उसने सब कुछ हासिल कर लिया हो।
वो दूसरों को नीचा दिखाने के लिए अहंकार का सहारा लेता है। भले ही उनके पास सब कुछ न हो। वह खुद को दूसरों से श्रेष्ठ समझता है।
अहंकार में डूबा व्यक्ति एक ऐसे साम्राज्य का राजा होता है, जहां कोई प्रजा नहीं होती। वह कल्पना में रहता है। अपने ही बनाये हुए ख्यालों में रहता है। अहंकार की बैसाखी का सहारा लेकर वह जीवन यापन करता है।
जब अहंकारी व्यक्ति की महत्वाकांक्षा पूरी नहीं होती और उसकी झूठी शान को ठेस पहुंचती है। तो वह दूसरों की अवहेलना से बचने के लिए अहंकार से बनाये हुए छलावे में अपने आपको ढाल लेता है।
उसके मन में असुरक्षा की भावना पैदा हो जाती है। उसे डर होता है की कही उसकी शान में कमी न आजाये । उसकी इज़्ज़त कम न हो जाए।
ऐसा व्यक्ति बाहर से शक्तिशाली होने का दिखावा करता है। पर अंदर ही अंदर असुरक्षित महसूस करते है।
एक शांत और विनम्र स्वभाव का व्यक्ति ऐसे व्यक्ति की बातों से ही समाज जाता है कि वह घमंड के नशे में चूर है।
ऐसे में इंसान को अहंकार से बचना चाहिए, भले ही वो कितना ही बड़ा आदमी क्यू न हो।
इस लिए कहा जाता है कि अहंकार असुरक्षा का बहरूपिया है।

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