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एक लड़की के दिल से अपने पिता के लिए कविता 


आज मेरी शादी हैं विदा होते वक़्त अपने पिता की आँखों में आसूं पहली बार देख रही हूँ। में भी उन्हें देख कर रो रही हूँ। 

पापा ओ मेरे पापा । डोली मेरी उठ रही हैं और पलके आपकी गीली हैं इस असमंजस में हूँ की खुशियां आ रही हैं या गम देकर जा रही हूँ

प्यारे पापा ओ प्यारे पापा । किसी और के घर जा रही हूँ। किसी और को अपना बना रही हूँ मेरी जिम्मेदारी बढ़ गयी हैं आपके बारे में सोच कर मन उदास हो जाता हैं। में दूर जा रही हूँ, आप भी उदास हो,मुझे आभास हो जाता है।


मुझे पता हैं मेरे बगैर आप खाना नहीं खाते हो । अब आपको मेरे बगैर खाना खाना होगा, मेरे बगैर रहना होगा। वादा है मेरा आपसे, आपको कभी अकेला महसूस नहीं होने दूंगी, दूर हूँ पर आपकी परछाई बनकर आपके साथ रहूंगी ।

पापा ओ  प्यारे पापा ।  कैसे अपने मुझे आगे बढ़ना सिखाया, मुझे जीवन की कठिनाईओं से लड़ना सिखाया । मेरी बचपन की गुड़िया से लेकर आइस क्रीम और चॉकलेट तक अपने मुझे सब दिलाया

पने मेरी हर छोटी सी छोटी खुशियाँ का ध्यान रखा । अपनी परवाह न करके भी आपने हमेशा मेरा मान रखा।

कैसे में दीपावली पर दीपक जलाति थीदीयों की रोशनी में अपने ख्यालों को जगमगाती थी 

मेरे सपनो के हर मंजिल को पाने की राह खोजती थी वो आप ही थे जिसने मेरे सपने पुरे करवाए 

बचपन में साइकिल से मुझे स्कूल छोड़ना और फिर कॉलेज बाइक से मुझे लेकर जाना। मुझे गन्दी निगहाओं से बचाना । जब में डरती थी तो मेरा हौसला बढ़ाया। आपने अपना पूरा जीवन मेरी खुशियों के लिए खपाया

पापा ओ मेरे पापा । कैसे भूल जाऊ में आपको

आपकी इज़्ज़त के खातिर मैंने अपने दिल को समझाया  ऐसा कोई काम नहीं किया जिससे आपकी इज्जत कम हो और ना ही आपको कभी दुःख पहुँचाया

पापा ओ मेरे पापा । आप ही तो जिसने मुझे जीवन दिया  मेरे हर फैसले को सहराया 

दुनिया की परवाह न करते हुए, आपने हर कदम पर मेरा साथ दिया 

मेरी जिंदगी में चार चांद लगा दिए खुशियों के अंबार लगा दिए कैसे में भूल जाऊ अपने मुझे पर इतने एहसान किये 

आज में डोली में बैठ कर जा रही हूँ, नयी जिमेदारियो का बोझ उठा रही हूँ, धीरे धीरे यह पल बीत रहे है। मेरी आँखों के आंसूं आपकी यादों का बोझ लेकर गिर रहे हैं

कसम खाती हूँ आपकी पापा, आपका ख्याल बाद में भी रखूँगी, में तब भी थी, में आज भी हूँ,आपको कभी अकेला न होने दूंगी 

प्यारे पापा ओ प्यारे पापा । आपका ख्याल रखना आपके जीवन में खुशियां कभी कम न हो, आप मुस्कराते रहना आप रोते हो तो में सहम जाती हूँआप मेरी कमजोरी हो आपके बिना रह नहीं पाती हूँ। 

पर फिर आपकी इज़्ज़त का ख्याल आता हैं। आपका रोता हुआ चेहरा  याद आता हैं। विदा होकर में जा रही हूँ मन करता हे रोक लूँ अपने आपको, फिर से गले लगा लूँ आपको 


प्यारे पापा ओ प्यारे पापा । शादी मेरी हो रही हैं, डोली मेरी उठ रही हैं वादा हे मेरा आपसे, आपका सिर कभी नहीं झुकने दूँगी आपकी परी हूँ आपका नाम रोशन करूंगी 








(यह कविता उन पिताओं के लिए जिनकी बेटियां है जो अपनी बेटियों से बहुत प्यार करते हैं । बेटी होना गर्व की बात हैं)



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