विद्यार्थी जीवन पर निबंध
एक विद्यार्थी का जीवन कुछ हद तक कठिन होता है:-
स्कूल से लेकर कॉलेज तक और कॉलेज के बाद भी इंसान विद्यार्थी बना रहता है, और कुछ न कुछ सीखता ही रहता है लेकिन जीवन की कठिनाई साथ नहीं छोड़ती ।
बचपन में रोते रोते स्कूल जाना अपने माता पिता से अलग होना बहुत ही दुःख दाई होता है, लेकिन हमें अब पता चलता है कि माता पिता हमें क्यों स्कूल भेजते थे ताकि हमारा जीवन सुधर जाए हम अपना भविष्य बना सके।
पर भविष्य अच्छा करने के लिए बचपन तो जैसे स्कूल बैग्स के बोझ में दबता चला जाता है।
वो बचपन की पीड़ा वो बचपन के दुःख आज भी याद आते हे, वो रोज़ टूशन पैदल जाना । एक छात्र अपने कंधे पर बैग लटकाए, अपनी मंजिल की ओर चल पड़ा है।
मार्क्स कम आते थे तो पनिशमेंट मिलती थी और ज्यादा आते थे तो और ज्यादा क्यों नहीं लाए कहा जाता । दिन रात पढ़ाई करना जैसे एग्जाम नहीं जिंदगी का फैसला हो रहा हो ।
जिंदगी के हर मोड पर विद्यार्थी : जिंदगी के हर मोड पर कैसे एक विद्यार्थी अपने आंसुओ को पीता है और मुस्कराते हुए माँ बाप के सपने पुरे करने चल निकलता हे।वही करना जो माता पिता कहते, वही सीखना जो स्कूल में सिखाया जाता,पर क्या किसी ने यह जानने की कोशिश की है कि एक विद्यार्थी क्या चाहता है?
माता पिता मेहनत करके अपने बच्चो को पढ़ाते है वो अपने बच्चो के लिए सब कुछ करते हे उनकी हर इच्छा पूरी करने की कोशिश करते हे । और एक विध्यार्ती को क्या चाहिए भला?
क्या सच में ?
एक विद्यार्थी यही चाहता है कि कोई उसके आंसू पोंछ दे :
एक विद्यार्थी यही चाहता की कि कोई उसे स्कूल की भारी बैग्स से आज़ादी दिलवाये।
एक विद्यार्थी यही चाहता हे की वो जो चाहे जिस चीज़ में उसकी रुचि हो वो करने की इजाजत मिले।
एक विद्यर्थी अपने बचपन को वो दिन वापिस पाना चाहता है जब वो दोस्तों के साथ खेलता, हँसता और ख़ुशी से दिन गुजारता था ।
एक विध्यार्ती आज़ाद पंछी की तरह उड़ना चाहता है :अपने सपनो को नई उड़ान देना चाहता है, अपने जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति चाहता है । वह मुस्कुराना चाहता है, वह खुश रहना चाहता है, वह अपने माता-पिता को बताना चाहता है कि वह किसी से कम नहीं है और उसमें सफलता पाने की क्षमता है।
जीवन में दुखों और सुखों का दौर एक विद्यार्थी जीवन में चलता हे:
कभी सुख, तो कभी दुःख जीवन में आते हे, पर जब सुख की अनुभूति कम होती है और जब दुखों से ज्यादा सामना होता है ।
तो निराशा हाथ लगने लगती है और बढ़ती निराशा से विश्वाश डगमगाने लगता हे।
जिंदगी की असलियत को पहचान कर हम जीवन के हर लम्हे में खुशियां ढूंढ ले तो जीवन में विश्वास और खुशी की लहर दौड़ने लगती है।
और जीवन में विश्वास बढने लगता हे, जीवन को विश्वास में नहीं, बल्कि विश्वास को जीवन में लाये, विश्वास जो एक विद्यार्थी को खुशी से आगे बढ़ने की उम्मीद जगाता है।
विशवास जो जीवन में अँधियो और तूफ़ान का सामना करने का हौसला देता हे, और इसलिए एक विद्यार्थी को विश्वास कभी ना खोना चाहिए।
विद्यार्थी न रुकता है और न थकता है और जीवन की यात्रा में इस उम्मीद में चलता रहता है कि एक दिन कोई उसे समझेगा।

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